राजनीतिस्रोत: The Hindu
भारत में राष्ट्रीय गीत और गान के लिए नया प्रोटोकॉल
गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026
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भारत में राष्ट्रीय गीत और गान के लिए नया प्रोटोकॉल: कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गान "जन गण मन" से पहले राष्ट्रीय गीत "वंदे मातरम्" बजाना अनिवार्य है। दर्शकों को राष्ट्रीय गीत के दौरान खड़ा होना आवश्यक है, विशेष परिस्थितियों को छोड़कर। यह प्रोटोकॉल आधिकारिक समारोहों, प्रसारणों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर लागू होता है। स्कूलों को इन राष्ट्रीय प्रतीकों के गायन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
विस्तृत विवरण
- बजाने का क्रम: कार्यक्रमों में "जन गण मन" से पहले "वंदे मातरम्"।
- अनिवार्य सम्मान: दर्शकों को राष्ट्रीय गीत के लिए खड़ा होना चाहिए।
- बजाने के अवसर: इसमें राष्ट्रपति कार्यक्रम, प्रसारण, ध्वज समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं।
- संगीत प्रोटोकॉल: जब बैंड द्वारा बजाया जाता है तो राष्ट्रीय गीत से पहले ड्रम बजाए जाएं।
- स्कूल निर्देश: सम्मान बढ़ाने के लिए सामुदायिक गायन को प्रोत्साहित किया जाता है।
- वंदे मातरम् का उद्गम: 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित।
- राष्ट्रीय स्थिति: राष्ट्रीय गान के साथ राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मानित।
- स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका: 1896 में कांग्रेस द्वारा जनजागरण के लिए अपनाया गया।
- विदेश में प्रभाव: भारतीय क्रांतिकारियों द्वारा एक जुट होने के नारे के रूप में उपयोग किया गया।
- जन गण मन का उद्गम: 1911 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित।
- पहली प्रस्तुति: 1911 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गाया गया।
- आधिकारिक स्वीकृति: 24 जनवरी, 1950 को राष्ट्रीय गान के रूप में अपनाया गया।
- अनुवाद: टैगोर द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: गान में "सिंध" शब्द में कोई बदलाव नहीं।
- विशेष तथ्य: टैगोर ने भारत और बांग्लादेश के लिए गान लिखे।
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